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भ्रष्टाचार का मास्टरमाइंड! प्रभा भंडारी की जमानत खारिज

लखनऊ: केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग की आईआरएस अधिकारी प्रभा भंडारी को रिश्वत मामले में बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में उदारता नहीं बरती जा सकती। कोर्ट ने पाया कि आरोपी के खिलाफ मौजूद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बेहद ठोस और गंभीर हैं, जिससे उनकी संलिप्तता स्पष्ट होती है।इस मामले में सीबीआई द्वारा पेश की गई व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्डिंग अहम साक्ष्य बनी। रिकॉर्डिंग में प्रभा भंडारी अपने अधीनस्थ अधिकारी को कथित तौर पर रिश्वत की रकम को ‘सोने में बदलने’ का निर्देश देती सुनाई दीं। कोर्ट ने इसे गंभीर आपराधिक संकेत मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।अभियोजन के अनुसार, झांसी में तैनाती के दौरान प्रभा भंडारी ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर जीएसटी चोरी के एक मामले को दबाने के बदले व्यापारियों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की मांग की थी।सीबीआई ने ट्रैप के दौरान सह-आरोपी अधीक्षक अजय शर्मा के पास से 70 लाख रुपये बरामद किए थे। जांच में भंडारी को इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया गया है।सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि उनके पास से कोई रकम बरामद नहीं हुई और मानवीय आधार पर जमानत दी जानी चाहिए, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पद का दुरुपयोग कर इस तरह के निर्देश देना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रभा भंडारी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा, जबकि मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

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