यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो
नई दिल्ली: अमेरिका में ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच रक्षा खर्च को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेंटागन ने इस युद्ध के लिए अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि की मांग की है, जिसे मंजूरी के लिए अमेरिकी कांग्रेस के पास भेजा गया है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव वाइट हाउस के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस आंकड़े की पुष्टि से बचते हुए कहा कि राशि में बदलाव संभव है, लेकिन युद्ध के लिए पर्याप्त फंडिंग जरूरी है।यह मांग ऐसे समय आई है जब अमेरिकी संसद ने इस सैन्य अभियान को औपचारिक मंजूरी नहीं दी है। सांसदों के बीच युद्ध की रणनीति और उसके दायरे को लेकर असमंजस बना हुआ है। सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के कई ‘फिस्कल हॉक्स’ बड़े सरकारी खर्च के विरोध में हैं, जबकि डेमोक्रेट्स तब तक समर्थन देने को तैयार नहीं हैं जब तक प्रशासन स्पष्ट रणनीति पेश नहीं करता।यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो पेंटागन का बजट मौजूदा 800 अरब डॉलर से कहीं अधिक हो जाएगा। गौरतलब है कि इसमें पहले से ही 150 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग शामिल है, जो रक्षा क्षमताओं के उन्नयन के लिए दी गई थी।अब यह प्रस्ताव अमेरिकी राजनीति में बड़ी परीक्षा बन गया है। इसे पारित कराने के लिए रिपब्लिकन नेताओं को या तो अकेले प्रयास करना होगा या फिर डेमोक्रेट्स के साथ समझौता करना पड़ेगा, जिससे यह पैकेज और महंगा हो सकता है।
मुख्य बिंदु
- 200 अरब डॉलर की मांग: पेंटागन ने ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए भारी फंड की मांग की।
- कांग्रेस में मंजूरी बाकी: प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस के पास, अभी तक अंतिम स्वीकृति नहीं।
- राजनीतिक टकराव: रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच खर्च और रणनीति पर मतभेद।
- खर्च पर विरोध: रिपब्लिकन के ‘फिस्कल हॉक्स’ इतने बड़े रक्षा खर्च के खिलाफ।
- बजट में उछाल संभव: मंजूरी मिलने पर पेंटागन का बजट 800 अरब डॉलर से काफी ऊपर जा सकता है।
- रणनीति पर सवाल: डेमोक्रेट्स ने स्पष्ट युद्ध योजना के बिना समर्थन देने से इनकार किया।
- वैश्विक असर: बढ़ता रक्षा खर्च और युद्ध अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
















