सवांददाता-सुनील तिवारी
कानपुर में गंगा और पांडु नदी को साफ करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए बायोरेमेडिएशन सिस्टम की हकीकत चौंकाने वाली सामने आई है। नगर निगम ने रानी घाट, रफाका समेत 14 नालों के पानी को शोधित करने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये का ठेका ऑर्गनिक 121 साइंटिफिक प्राइवेट लिमिटेड को दिया है, लेकिन इसके बावजूद प्रतिदिन लगभग 5.30 करोड़ लीटर गंदा पानी बिना शोधित हुए सीधे नदियों में गिर रहा है। रविवार को की गई पड़ताल में कई स्थानों पर टंकियों के वाल्व बंद या खराब मिले, जिससे केमिकल नालों में जा ही नहीं रहा था।जांच में सामने आया कि पनकी नाले की टंकी का वाल्व बंद था, जबकि रानी घाट नाले की एक टंकी का वाल्व खराब मिला। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार केवल अधिकारियों के निरीक्षण के समय टंकियों में केमिकल डालकर फोटो-वीडियो बनाता है और बाद में वाल्व बंद कर देता है। पनकी पड़ाव पर लगी टंकी में केमिकल भरा होने के बावजूद नल बंद मिला, जिससे गंदा पानी सीधे पांडु नदी में जा रहा था। लोगों का कहना है कि टंकियों में केमिकल महीने में एक-दो बार ही भरा जाता है, जबकि व्यवस्था के अनुसार इसे लगातार नालों में गिरना चाहिए।
अटल घाट के पास परमिया (रामेश्वर) नाले में भी ठेकेदार की मनमानी सामने आई। यहां टंकी झाड़ियों के बीच छिपाकर लगाई गई है, जिससे असली स्थिति का पता ही न चले। आसपास के लोगों का कहना है कि नाले के आसपास कहीं भी टंकी दिखाई नहीं देती। इससे पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय निवासी भाजपा नेता मनीष बाजपेई का कहना है कि ठेकेदार के कर्मचारी केवल औपचारिकता निभाने के लिए केमिकल डालकर फोटो खींचते हैं और फिर वाल्व बंद कर चले जाते हैं। कई महीनों तक टंकी खाली पड़ी रही और दो दिन पहले ही केमिकल डाला गया, लेकिन नाले में छोड़ा ही नहीं जा रहा।
इस पूरे मामले में नगर निगम के अफसरों और ठेकेदार कंपनी की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नालों का गंदा पानी पहले की तरह गंगा और पांडु नदी में गिर रहा है, जिससे नदी की सफाई के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है ।
















