तेल संकट का खतरा! होर्मुज पर कब्जे की जंग तेज

अपाचे हेलीकॉप्टर और फाइटर जेट तैनात, ईरान का दावा—अमेरिका के कई विमान तबाह; बढ़ते तनाव से दुनिया में तेल संकट की आशंका

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिका पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते करीब 20 दिनों से चल रहे इस संघर्ष में अमेरिका अरबों डॉलर खर्च कर चुका है और उसके कई सैनिक भी हताहत हुए हैं।इस बीच सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अहम समुद्री मार्ग को खुलवाने के लिए यूरोप, चीन और जापान समेत कई देशों से मदद मांगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर होर्मुज को खोलने के लिए सैन्य अभियान तेज कर दिया है। यहां ईरानी ड्रोन को रोकने के लिए अपाचे हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं, जबकि फाइटर जेट ईरानी नौसैनिक ठिकानों पर लगातार हमले कर रहे हैं।अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के मिसाइल ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है, क्योंकि वहां से एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को खतरा था।दूसरी ओर ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर ग़ालिबाफ ने साफ कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। वहीं शीर्ष नेतृत्व भी इस मार्ग पर नियंत्रण बनाए रखने के संकेत दे चुका है।विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद होता है तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया के तेल उत्पादक देश अधिकतम 25 दिनों तक ही उत्पादन बनाए रख सकेंगे।गौरतलब है कि दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। ऐसे में यहां जारी तनाव ने पहले ही कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और ईंधन संकट की आशंका और गहरा गई है।

ईरान का पलटवार, 16 अमेरिकी फाइटर जेट और ड्रोन नष्ट

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब खतरनाक हवाई युद्ध का रूप ले चुका है, जहां अमेरिका को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। रक्षा अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिकी वायुसेना के कम से कम 16 सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं।इनमें सबसे ज्यादा नुकसान अत्याधुनिक ड्रोन बेड़े को हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 10 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन तबाह हुए, जिनमें से 9 को ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। वहीं एक ड्रोन जॉर्डन के एयरफील्ड पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले की चपेट में आ गया, जबकि कुछ तकनीकी खराबियों के कारण भी नष्ट हुए।सबसे चिंताजनक पहलू ‘फ्रेंडली फायर’ और तकनीकी चूक से हुआ नुकसान है। कुवैत में गलत पहचान के चलते अमेरिकी सेना ने अपने ही तीन एफ-15 लड़ाकू विमानों को मार गिराया। इसके अलावा, एक केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर के क्रैश होने से चालक दल के सभी छह सदस्यों की मौत हो गई। सऊदी अरब में तैनात पांच अन्य टैंकर भी मिसाइल हमलों में क्षतिग्रस्त हुए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि आमतौर पर हर युद्ध में हवाई बढ़त हासिल करने वाली अमेरिकी वायुसेना इस बार पूरी तरह नियंत्रण स्थापित नहीं कर पाई है। हाल ही में एक अत्याधुनिक एफ-35 फाइटर जेट को भी इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।दूसरी ओर ईरान ने अपने ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों के जवाब में कतर और सऊदी अरब के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना तेज कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्गों पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष और तेज होता जा रहा है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य बिंदु

  • 16 अमेरिकी विमान तबाह: ईरान ने दावा किया है कि अब तक अमेरिका के 16 सैन्य विमान नष्ट किए गए हैं।
  • ड्रोन को सबसे ज्यादा नुकसान: इनमें 10 MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं, जिनमें से ज्यादातर एयर डिफेंस सिस्टम से गिराए गए।
  • F-15 भी हुए शिकार: कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ की घटना में अमेरिका के 3 F-15 फाइटर जेट नष्ट हुए।
  • मिसाइल हमले और तकनीकी खराबी: कुछ विमान मिसाइल हमलों और तकनीकी कारणों से भी नष्ट हुए।
  • टैंकर विमान क्रैश: KC-135 रिफ्यूलिंग टैंकर के क्रैश में 6 सैनिकों की मौत हुई।
  • हवाई बढ़त पर असर: विशेषज्ञों के मुताबिक इस युद्ध में अमेरिका को एयर सुपीरियरिटी बनाए रखने में दिक्कत आ रही है।
  • तनाव बढ़ा: मिडिल ईस्ट में संघर्ष और तेज हो गया है, जिससे वैश्विक सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है।

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