सवांददाता सुनील तिवारी
कानपुर: फर्जी डिग्री और अंकपत्रों की खरीद-फरोख्त के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए नाम सामने आ रहे हैं। इस मामले में अब बाबूपुरवा निवासी अधिवक्ता शमशाद अली फिर से पुलिस के निशाने पर आ गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार उनसे दोबारा पूछताछ की तैयारी की जा रही है और जल्द ही उन्हें थाने बुलाकर बयान दर्ज किए जाएंगे। इससे पहले भी पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए थाने लाई थी, लेकिन कुछ ही देर में उन्हें छोड़ना पड़ा था।मामले की शुरुआत तब हुई जब 18 फरवरी को किदवई नगर थाना पुलिस ने जूही कलां स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय पर छापा मारा था। यहां से उत्तर प्रदेश समेत नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की एक हजार से अधिक अंकतालिकाएं और डिग्रियां बरामद हुई थीं। पुलिस ने गिरोह के सरगना रायबरेली निवासी शैलेंद्र कुमार ओझा समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि शहर के कई लोगों को फर्जी एलएलबी की डिग्रियां उपलब्ध कराई गई थीं।
जांच के दौरान बाबूपुरवा निवासी अधिवक्ता शमशाद अली समेत शहर के दस अधिवक्ताओं के नाम सामने आए। इतना ही नहीं, आरोपियों की कॉल विवरणी खंगालने पर पुलिस को शमशाद और गिरोह के सरगना के बीच कई बार लंबी बातचीत के प्रमाण भी मिले हैं। यही वजह है कि पुलिस को संदेह है कि अधिवक्ता का इस पूरे प्रकरण से सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध हो सकता है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया था जब कुछ दिन पहले शमशाद को थाने लाए जाने के दौरान महापौर के अधिवक्ता बेटे अनुराग पांडेय अपने साथियों के साथ थाने पहुंच गए और उन्हें छोड़ने का दबाव बनाया। इसके बाद पुलिस ने लिखित कार्रवाई कर उन्हें जाने दिया था। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामाजिक माध्यमों पर तेजी से वायरल हुआ था। अब पुलिस एक बार फिर पूरे प्रकरण की कड़ियां जोड़ते हुए साक्ष्य जुटा रही है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में डिग्री कांड में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
















