जहरीला पानी बना खतरा | 90% लोगों के खून में मिला क्रोमियम, प्रशासन कटघरे में

सवांददाता -सुनील तिवारी

कानपुर। शहर के औद्योगिक इलाकों में रहने वाले लोगों की सेहत पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि शहर के जाजमऊ और रूमा सहित कई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के खून की जांच में बड़ी मात्रा में कैंसरकारी तत्व क्रोमियम पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक हजारों लोगों के खून के नमूने लिए जा चुके हैं, जिनमें से आई रिपोर्टों में लगभग 90 प्रतिशत लोगों के शरीर में क्रोमियम की मौजूदगी सामने आई है। इसके अलावा कुछ लोगों के खून में पारा और सीसा जैसे खतरनाक तत्व भी पाए गए हैं, जो लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग ने जनवरी में जाजमऊ और रूमा क्षेत्र के लोगों के खून के नमूने जांच के लिए एकत्र किए थे। 500 से ज़्यादा लोगों के नमूने लिए गए, जिनमें से 200 से ज़्यादा रिपोर्ट फरवरी में सामने आईं। इनमें 215 लोगों के शरीर में क्रोमियम पाया गया, जबकि चार लोगों में पारा और दस लोगों में सीसा मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर रिपोर्ट सामने आने के बावजूद इससे प्रभावित लोगों के इलाज की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। विभाग का कहना है कि अभी तक लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिले हैं, इसलिए उपचार की जरूरत नहीं बताई जा रही है।
दूसरी ओर जाजमऊ, रूमा, पनकी औद्योगिक क्षेत्र, नौरैयाखेड़ा, गोलाघाट, राखी मंडी और तेजाब मिल जैसे इलाकों में पीने का पानी पहले की तरह ही दूषित आ रहा है। जलकल विभाग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभाग भी पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार क्रोमियम, सीसा और पारा जैसे तत्व शरीर के लिए बेहद खतरनाक होते हैं और ये यकृत, गुर्दे समेत कई अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हजारों लोगों के खून में जहरीले तत्व मिलने के बावजूद प्रशासन अब भी लक्षणों का इंतजार कर रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों की जांच की जानी है, लेकिन अब तक केवल आंशिक जांच ही हो पाई है। बैठकें और योजनाएं बनने के बावजूद जमीन पर कोई ठोस काम दिखाई नहीं दे रहा, जिससे साफ है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते शहर की बड़ी आबादी की सेहत और जीवन दोनों खतरे में पड़े हुए हैं।

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