गैस संकट के बीच ईरान से भारत को राहत, एलपीजी टैंकर मंगलुरु की ओर

अमेरिकी छूट का असर, ‘ऑरोरा’ टैंकर मंगलुरु की ओर; रुपये में सौदा, गैस संकट के बीच राहत

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली: अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते 2019 से लगभग ठप पड़े भारत-ईरान ऊर्जा संबंध एक बार फिर बहाल होने के संकेत दे रहे हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और देश के भीतर गहराते गैस संकट के बीच ईरान से एलपीजी लेकर एक टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि यह कदम भारत के लिए राहत भरा साबित हो सकता है, खासकर उस समय जब देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर दबाव में है। जानकारी के अनुसार ‘ऑरोरा’ नामक एक टैंकर ईरान से एलपीजी लेकर भारत आ रहा है और इसके कर्नाटक के मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। यह पोत पहले चीन के लिए रवाना हुआ था, लेकिन बदलती परिस्थितियों के बीच इसका रुख भारत की ओर मोड़ दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी प्रशासन द्वारा 30 दिनों की विशेष छूट दिए जाने के बाद यह सौदा संभव हो पाया है। इस छूट का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों को नियंत्रित रखना है। इसी के तहत कुछ देशों को सीमित अवधि के लिए ईरान से ऊर्जा आयात की अनुमति दी गई है। भारत ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए एलपीजी की एक खेप मंगाने की पहल की है। बताया जा रहा है कि यह सौदा सीधे सरकार के स्तर पर नहीं, बल्कि एक ट्रेडिंग कंपनी के जरिए किया गया है।

इस सौदे की एक खास बात यह भी है कि भुगतान भारतीय रुपये में किया जाएगा। इससे न केवल विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा, बल्कि प्रतिबंधों के बीच व्यापार को आसान बनाने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में व्यापार की यह पहल भविष्य में भारत-ईरान आर्थिक संबंधों को नया आयाम दे सकती है। भारत इस समय दशकों के सबसे गंभीर गैस संकट का सामना कर रहा है। देश अपनी करीब 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों को आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में ईरान से आने वाली यह खेप घरेलू जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। सरकार पहले ही रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक उपयोग में गैस की कटौती कर चुकी है। इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है। ऐसे में यह अतिरिक्त आपूर्ति कुछ हद तक राहत देने वाली मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस एलपीजी खेप को देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—के बीच बांटा जाएगा। इन कंपनियों के जरिए गैस को देशभर में वितरित किया जाएगा, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर सरकारी स्तर पर फिलहाल सतर्कता बरती जा रही है। केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय ने ऐसे किसी टैंकर के भारत आने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों के मद्देनजर सरकार इस मामले में सार्वजनिक रूप से ज्यादा बयान देने से बच रही है।

इसी बीच पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। खासतौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल-गैस मार्गों में से एक है, वहां स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इस तनाव के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। कई टैंकर फंस गए थे, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार को विशेष प्रयास करने पड़े। कुछ जहाजों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है, जबकि बाकी के लिए प्रयास जारी हैं। भारत के सामने एक ओर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबावों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत भी है। ईरान से एलपीजी आयात का यह कदम इसी संतुलन का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत आने वाले समय में ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में और कदम उठा सकता है।

फिलहाल ‘ऑरोरा’ टैंकर के भारत पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। यदि यह खेप सुरक्षित पहुंचती है, तो यह न केवल तत्काल गैस संकट को कम करने में मदद करेगी, बल्कि भारत-ईरान ऊर्जा संबंधों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत होगी। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि यह एक अस्थायी राहत है। दीर्घकालिक समाधान के लिए भारत को ऊर्जा नीति में बड़े बदलाव और रणनीतिक फैसले लेने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here