सवांददाता-सुनील तिवारी
कानपुर: पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में जैविक खाद बनाने का कार्य लगभग ठप हो जाने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। प्लांट के गेट तक कूड़े के पहाड़ लग गए हैं, जिससे आसपास के गांवों में गंदगी, दुर्गंध और जहरीले धुएं से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। करीब 46 एकड़ में फैले इस प्लांट में रोजाना लगभग 1400 मीट्रिक टन कूड़ा पहुंच रहा है, लेकिन उसे संसाधित करने वाली 13 ट्रामल मशीनों में से सात खराब पड़ी हैं और ज्यादातर मशीनें धूल खा रही हैं। गुरुवार को मौके पर केवल दो ट्रामल ही चलती मिलीं, जिससे कूड़े का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात बद से बदतर हो रहे हैं।स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब वर्षों से डंप कूड़े में गर्मी के मौसम में मीथेन गैस बनने के कारण स्वतः आग लगने लगती है। करीब 20 दिन पहले भी कूड़े में आग लगने से जहरीला धुआं उठा, जिसका असर जमुई, बदुआपुर, कला का पुरवा, पनका, पनका बहादुरनगर, सुंदरनगर, गंगागंज से लेकर रतनपुर और भौंती तक देखा गया। क्षेत्र में मक्खियों का प्रकोप बढ़ गया है और सांस की तकलीफ, सिरदर्द व अन्य बीमारियों की शिकायतें बढ़ रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार कूड़े के जलने से निकलने वाले विषाक्त तत्व लंबे समय में कैंसर, हृदय रोग, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। क्षेत्रीय विधायक व समाजसेवी मनीष बाजपेई ने इस समस्या को उठाते हुए लोगों को राहत दिलाने की मांग सम्बंधित अधिकारी गढ़ से की है। वहीं कूड़े में लगने वाली आग से निपटने के लिए करीब आठ सबमर्सिबल पंप लगाने की योजना बनाई जा रही है। जेई कमलेश पटेल के अनुसार तीन फर्मों से इस कार्य को लेकर बातचीत हुई है और जल्द ही समाधान की दिशा में काम शुरू किया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- कूड़े का पहाड़ बना खतरा: कानपुर के पनकी स्थित A TO Z कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं।
- मशीनें पड़ी खराब: 13 ट्रामल मशीनों में से 7 खराब हैं, मौके पर सिर्फ 2 मशीनें ही चालू मिलीं।
- बीमारियों का खतरा: क्षेत्र में सांस की तकलीफ, सिरदर्द और अन्य बीमारियों की शिकायतें बढ़ रही हैं
- जनप्रतिनिधियों ने उठाया मुद्दा: क्षेत्रीय विधायक मनीष बाजपेई ने समस्या को उठाते हुए अधिकारियों से जल्द समाधान की मांग की है।
















