ईरान का बड़ा बयान, कहा—बातचीत नहीं, लड़ाई जारी रहेगी

विदेश मंत्री अराघची बोले, जरूरत पड़ी तो लंबी जंग के लिए तैयार

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य टकराव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि उसने न तो युद्धविराम की मांग की है और न ही किसी तरह की बातचीत की पहल की है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि जब तक जरूरत होगी, उसके सशस्त्र बल युद्ध जारी रखेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब इस संघर्ष के कारण भारत सहित कई देशों में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने न तो सीजफायर का अनुरोध किया है और न ही वार्ता की मांग की है। उन्होंने कहा कि देश के सशस्त्र बल तब तक लड़ाई जारी रखेंगे, जब तक परिस्थितियां इसकी मांग करती रहेंगी। लगभग तीन सप्ताह से ईरान के बीच अमेरिका और इजराइल के साथ सैन्य टकराव जारी है।अराघची ने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन अमेरिकी हमलों के कारण क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ गई है, जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि कुछ देशों ने अपने जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान से अनुरोध किया है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला ईरानी सैन्य बलों को लेना है।दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल आपूर्ति के लिए अहम इस समुद्री मार्ग पर फिलहाल आवागमन लगभग ठप है और सैकड़ों जहाज फंसे होने की खबरें हैं। सुरक्षा कारणों से कई शिपिंग कंपनियों और तेल निर्यातकों ने परिचालन रोक दिया है।गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित कई देशों संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और ओमान की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि उसका निशाना अमेरिकी ठिकाने हैं, हालांकि कई जगह हवाई अड्डों और रिहायशी इलाकों में हमलों की खबरें भी सामने आई हैं।

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच लंबी जंग की आशंका, वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है असर

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में पहुंच गया है। इस बीच युद्ध की अवधि को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष आर्थिक सलाहकार और वाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के प्रमुख केविन हैसेट ने कहा है कि पेंटागन के अनुमान के मुताबिक यह युद्ध चार से छह सप्ताह तक चल सकता है।सीबीएस के कार्यक्रम ‘फेस द नेशन’ में हैसेट ने कहा कि शनिवार तक पेंटागन का आकलन था कि मिशन को पूरा करने में चार से छह सप्ताह लग सकते हैं और फिलहाल अभियान तय समय से आगे बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप का ही होगा।हैसेट ने कहा कि इस सैन्य अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। उनका दावा है कि अमेरिका के मजबूत घरेलू तेल उत्पादन के कारण ईरान का प्रभाव 1970 के दशक जैसे वैश्विक तेल संकट की स्थिति पैदा नहीं कर पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर ट्रंप प्रशासन को पीछे हटाने की उम्मीद कर रहा है, तो यह उसकी बड़ी भूल है।

मध्य-पूर्व तनाव का असर, तेल की कीमतें 103 डॉलर पार

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग एक-पांचवें तेल और बड़ी मात्रा में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।इस बीच अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने एबीसी के कार्यक्रम ‘दिस वीक’ में कहा कि तेल और गैसोलीन की कीमतें फिलहाल ऊंची जरूर हैं, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहेगी। उनके मुताबिक यह संघर्ष कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो सकता है, जिसके बाद आपूर्ति में सुधार होगा और कीमतें गिरेंगी।वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की है। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इसमें भागीदारी की उम्मीद जताई है। हालांकि जापान की सत्तारूढ़ पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने टैंकरों की सुरक्षा के लिए जहाज भेजने को बड़ी चुनौती बताया है।ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नागरिकों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा है कि ईरान को क्षेत्रीय खतरे के रूप में कमजोर करना दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्य है, भले ही इसके कारण फिलहाल वैश्विक बाजार में अस्थायी अस्थिरता क्यों न देखने को मिल रही हो।

मुख्य बिंदु

  • ईरान ने साफ किया कि उसने न सीजफायर मांगा है और न बातचीत की पहल की है।
  • विदेश मंत्री अब्बास अराघची बोले – जब तक जरूरत होगी, ईरान के सशस्त्र बल युद्ध जारी रखेंगे।
  • अमेरिका और इजराइल के साथ लगभग तीन सप्ताह से सैन्य टकराव जारी है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में असुरक्षा बढ़ने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
  • दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है।
  • कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से परिचालन रोक दिया, सैकड़ों जहाज फंसे बताए जा रहे हैं।

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