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ईद पर कानपुर बना मिसाल, दो चरणों में नमाज और ‘सड़क पर नहीं’ का पालन

सवाददाता-सुनील तिवारी

कानपुर: ईद-उल-फितर का पर्व पूरे धार्मिक उल्लास और सौहार्द के साथ मनाया गया। शहर की बड़ी ईदगाह बेनाझाबर समेत प्रमुख मस्जिदों में शनिवार को दो पालियों में नमाज अदा की गई। पहली नमाज सुबह 8 बजे और दूसरी 9:30 बजे पढ़ी गई। भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था की गई थी।शहर काजी हाफिज मामूर अहमद जामई की अपील का असर साफ तौर पर दिखाई दिया। नमाजियों ने सड़क पर नमाज अदा करने के बजाय ईदगाह परिसर के भीतर ही इबादत की और देश में अमन-चैन व खुशहाली की दुआ मांगी। जामा मस्जिदों और अन्य बड़े इबादत स्थलों पर भी भीड़ के मद्देनजर दो बार नमाज पढ़ी गई।ईद के मौके पर सामाजिक और राजनीतिक सौहार्द की झलक भी देखने को मिली। पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी और विधायक अमिताभ बाजपेई ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। इरफान सोलंकी ने चार साल बाद अपनों के बीच ईद मनाने की खुशी जाहिर की और सभी को बधाई दी, साथ ही नवरात्र की शुभकामनाएं भी दीं।प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल और डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर लोगों को बधाई दी और बच्चों के साथ संवाद कर सौहार्द का संदेश दिया।जाजमऊ ईदगाह में करीब 45 हजार नमाजियों ने एक साथ नमाज अदा की, जहां परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने इस पर्व को खास बनाया।शहर की 300 से अधिक मस्जिदों में अलग-अलग समय पर नमाज अदा की गई। ईदगाहों और मस्जिदों में साफ-सफाई, चूने से बनाए गए निशान और अन्य व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की गई थीं, जिससे कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी।इस तरह कानपुर में ईद का त्योहार न सिर्फ धार्मिक आस्था बल्कि सामाजिक सौहार्द और अनुशासन का भी प्रतीक बनकर सामने आया।

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