आगरा हिरासत मौत मामला: 17 पुलिसकर्मियों के खिलाफ CID की चार्जशीट, कार्रवाई तय

मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर जांच पूरी, गैर इरादतन हत्या और अवैध हिरासत के गंभीर आरोप

यूपी क्राइम अलर्ट न्यूज़ ब्यूरो

गरा के बहुचर्चित राजू गुप्ता हिरासत मौत मामले में अब बड़ा एक्शन तय माना जा रहा है। मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर हुई जांच के बाद सीआईडी ने अपनी विवेचना पूरी कर 17 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट शासन को भेज दी है। इसमें सिकंदरा थाने में तैनात पुलिसकर्मियों पर गैर इरादतन हत्या और अवैध हिरासत जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सीआईडी की जांच में सामने आया कि जिस समय राजू गुप्ता की पिटाई हो रही थी, उस दौरान थाने में मौजूद किसी भी पुलिसकर्मी ने विरोध नहीं किया। कोर्ट ने भी अपने फैसले में माना कि यह घटना पुलिसकर्मियों की मौन सहमति से हुई।अपर जिला जज नितिन कुमार ठाकुर ने अपने 82 पेज के आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में “रक्षक ही भक्षक बन गए”। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक निर्दोष व्यक्ति को उसकी मां के सामने बेरहमी से पीटा गया, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया। आदेश की प्रति शासन और पुलिस कमिश्नर को भेजते हुए संबंधित अधिकारियों पर सेवा नियमों के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।जांच में यह भी उजागर हुआ कि प्रारंभिक विवेचना करने वाले अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया और न्याय की प्रक्रिया में बाधा डाली। कोर्ट ने इस पर भी कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि विवेचकों ने तथ्यों को दबाने का प्रयास किया।मामले ने उस वक्त पूरे शहर को झकझोर दिया था। पीड़ित की मां इंसाफ के इंतजार में ही दुनिया छोड़ गईं। घटना के बाद समाज के लोगों ने लगातार प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की थी।अब इस प्रकरण में सीआईडी की चार्जशीट के बाद 17 पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है और शासन स्तर पर अंतिम फैसला होना बाकी है।

मुख्य बिंदु

  • 17 पुलिसकर्मी आरोपित: आगरा के राजू गुप्ता हिरासत मौत मामले में 17 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी।
  • CID चार्जशीट दाखिल: जांच पूरी कर शासन को चार्जशीट सौंपी गई।
  • गंभीर धाराएं: गैर इरादतन हत्या और अवैध हिरासत जैसे आरोप लगाए गए।
  • कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “रक्षक ही भक्षक बन गए” – अदालत ने जताई नाराजगी।
  • मौन सहमति का आरोप: पिटाई के दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों ने विरोध नहीं किया।
  • जांच में लापरवाही: प्रारंभिक विवेचना में तथ्यों को दबाने के आरोप भी सामने आए।
  • मां को नहीं मिला न्याय: पीड़ित की मां इंसाफ का इंतजार करते हुए दुनिया छोड़ गईं।

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